क्यूँ हो गया पत्थर दिल तेरा पहाड़ा विच्च रहन वालिये

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

क्यूँ हो गया पत्थर दिल तेरा, पहाड़ा विच्च रहन वालिये।

कानू ला लिया गुफा दे विच्च डेरा, पहाड़ा विच्च रहन वालिये॥

इक अपनी मात सुनावण लायी, कईआ दीया गल्लां सुनिया मैं,

मैं एक दो दी नहीं गल करदा, है परख लई एह दुनिया मैं।

माये पाया गमां ने घेरा, पहाड़ा विच्च रहन वालिये॥

तेरी ममता पत्थर हो गयी ए, पत्थर दे विच्च माँ रह रह के,

मेरा हाल फकीरा हो गया ए, तेरी ही गम माँ सह सह के।

माये दिल टूटा ए मेरा, पहाड़ा विच्च रहन वालिये॥

जिन्ना दी अम्बडी रूस जावे, ओ पुत्तर दर दर रुल जांदे,

गैरा दी गल मैं करदा नहीं, अपने वी सारे भूल जांदे।

माये पा बच्चेआ वाल फेरा, पहाड़ा विच्च रहन वालिये॥

जो फूल डाली तो टूट जावन, ओ मन्नेया माँ कुम्ला जांदे,

फिर माँ वी चैन नहीं लै सकदी, ओ रोग अजेहा ला जांदे।

माँ कट दे चौरासी वाला फेरा, पहाड़ा विच्च रहन वालिये॥

अजे वी छड पहाडा नु, माँ आजा घर गरीबा दे,

तेनु मिलते तेरे दर्शी दे खुल जावन बूहे नसीबा दे।

कर हरदे आन बसेरा, पहाड़ा विच्च रहन वालिये॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।