मैं तर्द्रुस्त परिवार

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

एक बार नही सो बार नही,

मैं ता आज करा लख वार,

मैं होर कुझ नहियो मंगदा,

मैं तर्द्रुस्त परिवार, मैं होर कुझ नहियो मंगदा

बेठा भावे घर विच रुकिया न रुके माँ,

सिर तक कदे मेरे बचिया दा दुखिया न,

रहे घरो चो बीमारी बाहर,मैं होर कुझ नहियो मंगदा,

मैं तर्द्रुस्त परिवार..........

रुखी सुखी वी खा लवागे,

मिलु जेहो जेहा ओ खा लवागे,

कोई पावे न माडी मार,

मैं होर कुझ नहियो मंगदा

मैं तर्द्रुस्त परिवार..........

दुःख दे दिन न कदे दिखावे,

भरमे दा तू मान वदावी,

मिले काके नु सत्कार,

मैं होर कुझ नहियो मंगदा

मैं तर्द्रुस्त परिवार..........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।