ना कर माडा बंदियां

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॥ पावन पाठ ॥

ना कर माडा बंदियां पिछो पछतावेगा,

हाथ दी ता खो लावे गा मथे दी किदा खोवेगा

ना कर माडा बंदियां पिछो पछतावेगा...

खुद नु मिलाया ओह्दिया दा मान ना करी,

निमिया निमानिया नु पेरशान न करी,

अंत नु तू ओह कटेगा जेहरा भोवेगा,

ना कर माडा बंदियां.....

कहणु करदा माडा न रहना सदा जोश वे,

मुड वेला हाथ नि ऊना जदों आनी होश वे,

आज पेया तू हसदा कल रोवेगा,

ना कर माडा बंदियां......

सच्चा गुरु मिलदा ना जिन्द्जान देके,

गुरु दी रखले लाज नाम ले के,

पीठलुक तू सम्बल जा संजू काम दा वे,

ना कर माडा बंदियां

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।