कन्हैया काहे बात न मानत

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

कन्हैया काहे बात न मानत मोरी ॥

क्यूँकर जात करन चोरी तूँ , माखन की पर-दोरी,

किसी की तोड़े माखन-गगरी, किसी की बाँह मरोरी,

कन्हैया काहे बात न मानत मोरी.....

कौन कमी तोहे दही माखन की, क्यूँ करबै नित चोरी,

माखन चोर सुनत गोपिन मुख, छलके अँखियाँ मोरी,

कन्हैया काहे बात न मानत मोरी.....

बोले कृष्ण सुनौ री मैया,चंचल ब्रज की गोरी,

तूँ बातन उनके आ जाती,है मन की अति भोरी,

कन्हैया काहे बात न मानत मोरी.........

नैनन सैन बुलाकर मोहे, अंग लगावत छोरी,

कोऊ लेत गोद निज अपने,लेत बलैयाँ मोरी,

कन्हैया काहे बात न मानत मोरी......

निज हाथन मोरे मुख माखन,देत लगाय निगोरी,

जान उमर कौ बारौ मोसें, करतीं हैं बरजोरी,

कन्हैया काहे बात न मानत मोरी.......

मोसें काम करातीं घर कौ, डाल प्रेम की डोरी,

लाज लगै मोहि तोह बतावत, निरलज सिगरीं छोरी,

कन्हैया काहे बात न मानत मोरी....

मैं क्या मोरी बला करै नहिं, काहूँ के घर चोरी,

मुदित मातु सुन बतियाँ नैनन, नीर 'अशोक' बहो-री,

कन्हैया काहे बात न मानत मोरी....

(रचना-अशोक कुमार खरे)

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।