शैलसुता-सुत उर में बसाकर

पारंपरिक
श्री गणेश भजन गणेश भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

शैलसुता-सुत उर मैं बसाकर, इस जग में मुद-मंगल पाकर,

कह दूँ मैं दिल का राज, खुश हूँ बहुत मैं आज,

शैलसुता-सुत उर मैं बसाकर, इस जग में मुद-मंगल पाकर,

कह दूँ मैं दिल का राज, खुश हूँ बहुत मैं आज,

कान सुनें गुणगान तुम्हारा, नैन ललाम-स्वरूप निहारे,

वास-सुवास सुअंग की प्यारे, आती रहे निज नासिका द्वारे,

शीश झुके पद-पंकज आपके, हाथ सदा पद-पद्म पखारे,

सादर नाम रटे रसना नित, ध्यान तुम्हार सदा मन धारे,

शैलसुता-सुत उर मैं बसाकर, इस जग में मुद-मंगल पाकर,

कह दूँ मैं दिल का राज, खुश हूँ बहुत मैं आज,

हे सुर-सेव्य गणेश कलानिधि, विघ्न-विनाशक विद्या-वारिधि,

शरण-विहीन को ले लो शरण में, दे दो ज्ञान सुजान दयानिधि,

गजकर्णक सेवक सुखदायक, हे गजमुख हे प्रिय सुरनायक,

मैं तो करूँ नित सेवा तिहारी, रक्षा करो तुम मेरी विनायक,

शैलसुता-सुत उर मैं बसाकर, इस जग में मुद-मंगल पाकर,

कह दूँ मैं दिल का राज, खुश हूँ बहुत मैं आज,

मोदक अर्पित सिद्धि-सदन को, शान्त करो मन रूप विहंगा,

सिद्धि-सदन बस दे दो यही वर, मन में बसे नित भक्ति की गंगा,

ब्रह्म-रूप हरि-रूप नमस्ते, रुद्र-रूप गणनाथ नमस्ते,

देव विनायक दूर करो दुःख, ज्ञान-निधे शिवपुत्र नमस्ते,

शैलसुता-सुत उर मैं बसाकर, इस जग में मुद-मंगल पाकर,

कह दूँ मैं दिल का राज, खुश हूँ बहुत मैं आज,

(गीत रचना- अशोक कुमार खरे)

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।