जीवन बहता पानी रे प्राणी

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॥ पावन पाठ ॥

जीवन बहता पानी रे प्राणी काहे, करे तूँ गुमान रे ll

करे तू गुमान रे, अरे इंसान रे ll

दो दिन की जिंदगानी रे प्राणी काहे, करे तूँ गुमान रे

जीवन बहता पानी रे प्राणी...........

धन और दौलत, बड़ा ही कमाया, इस माया ने, हरी को भुलाया ll

माया तो, आनी है जानी रे प्राणी काहे, करे तूँ गुमान रे

जीवन बहता, पानी रे प्राणी..........

काया पे काहे, मान करे हैं, इस पे तूँ क्यों, अभिमान करे हैं ll

रहता न रूप जवानी रे प्राणी काहे, करे तू गुमान रे

जीवन बहता, पानी रे प्राणी ........

मोह माया से, प्रीत हटा ले, हरी नाम से, प्रीत लगा ले ll

छोड़ दे यह मनमानी रे प्राणी काहे, करे तू गुमान रे

जीवन बहता, पानी रे प्राणी ...........

अपलोड करता- अनिल भोपाल

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।