महसर जाके मैया मेरी मौज हो गई

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन रानी सती दादी भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

महसर जाके मैया मेरी मौज हो गई,

होली और दिवाली मेरी रोज हो गई,

तेरे नाम का डीप जलाया बिन मांगे मैंने सब कुछ पाया,

तुझको पाके पूरी मेरी खोज हो गई,

होली और दिवाली मेरी रोज हो गई,

तेरे नाम से रंगली चुनरिया,

उतरे न रंग धोऊ सारी ऊमारियाँ,

सब कुछ तू ही मेरी सोच होगई,

होली और दिवाली मेरी रोज हो गई,

दीप भुजे न कभी रंग उतरे ना श्याम कहे तेरा मेरा साथ छूटे न,

बिन तेरे ज़िंदगानी भोज हो गई,

होली और दिवाली मेरी रोज हो गई,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।