आज थारे भगता ने मैया

पारंपरिक
महादेव भजन रानी सती दादी भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

आज थारे भगता ने मैया नानातो भर भर के झोली हाथा से बांटो,

सारो जग भोले तने दादी तू ही सेठानी है तू ही महारानी है तू ही राजरानी,

बाँट रही अलग अलग नाम से तू ही माँ दुर्गा है तू ही माँ काली है तू ही माँ भवानी,

तेरे हाथा में ही माँ सबको खातों,

भर भर के झोली हाथा से बांटो.......

दादी को माल पोता खावे है साँची बोलू हु इसलिए डोलू हु दर पे मावड़ी,

तू न खजानो क्यों न लुटावे है मासे छुपावे है क्यों न दिखवाए है माने मावड़ी,

थारे दर पे दादी जी क्या है घाटों,

भर भर के झोली हाथा से बांटो....

देख लिया सेठ मोटा मोटा शीश झुकावे है भोग लगावे है दर तेरे आके,

पीछो तेरा छोड़ा को ना ही दादी लूट मचवा गए सगळा ले ज्वागे भगता के आगे,

श्याम कहे सगळा ही झंझट ने काटो,

भर भर के झोली हाथा से बांटो

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।