तेरी तुलना किससे करू माँ

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

तेरी तुलना किससे करू माँ तुझसा और ना कोई,

जब जब टुटा मेरा खिलौना मुझसे पहले तू रोइ,

तेरी तुलना किससे करू माँ,

जब मैं रोया फुट फुट कर बातो से बेहलाई,

थपकी देकर लोरी सुना कर पलकों पे है झुलाये,

जब तक सोया मैं ना चैन से तब तक सुना सोइ,

तेरी तुलना किससे करू माँ........

कितने दर्द सहे है तूने होठ पे उफ़ ना लाइ,

खून पीला कर पाला मुझको दुःख से नहीं गबराइ,

मैं खोया अब अपने खाबो में तू मेरे ख्याल में खोई,

तेरी तुलना किससे करू माँ..............

मेरे हासने पे हस्ती है रोने पे रोती है,

फिर भी समज नहीं मैं पाया माँ कैसी होती है,

अपनी हर सांसो पे तूने दुनिया मेरी संजोहि,

तेरी तुलना किससे करू माँ......

खोकर फिर से मिल जाता है दुनिया का सुख सारा,

अगर हाथ से माँ जो निकली मिलती नहीं है दुबारा,

जिसने हर पल पीड़ा मेरी अपने दिल पे धोई,

तेरी तुलना किससे करू माँ......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।