सोनी सोनी प्यारी प्यारी लाया हां चुनरिया

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

सोनी सोनी प्यारी प्यारी लाया हां चुनरिया,

ज़रा ओढ़ के दिखा महरो मान बड़ा बोले टाबरियां,

भाव के बंदे थारा प्रेम का जरिया,

ज़रा ओढ़ के दिखा महरो मान बड़ा बोले टाबरियां,

सोनी सोनी प्यारी प्यारी लाया हां चुनरिया,

जयपुर से माँ पोत मँगवायो चिपकाया थारा भाव छू,

चार कुठ में चार मोरियाँ खूब सज्या मैं चाव सु,

चम् चम् चमके चुनड़ी धमके आया माँ थारे द्वार पे,

पल में ही बाजे छोटा छोटा रे गुगरियाँ,

ज़रा ओढ़ के दिखा महरो ......

लहराती थी लाल चुनर में मैया प्यार वासो महारो,

यह चुनरी ने ओढ़ के लागे रूप सजिलो माता थारो,

मैया प्यारी लागे नयारी इ सारे संसार में,

डर लागे माने कहे लागे न नजरिया,

ज़रा ओढ़ के दिखा महरो...

चुनार ओडन खातिर मैया पल में दोढ़ी आई है,

श्याम कावे या चुनरी प्यारी भगता के मन भई है,

उड़के बैठी रतन सिंगसन मूल के मैया प्यार से,

चरना में बीते मैया मारी रे उमरिया ओ जरा,

ज़रा ओढ़ के दिखा महरो

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।