मन मोह लेआ कुंडला वाले ने

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मन मोह लेआ कुंडला वाले ने।

बंसी दी तान सूना के,

सोहने रूप डा जादू पा के,

नैना दे तीर चला के,

मन मोह लेआ पीत पट वाले ने।

भरी भराई रह गयी मटकी,

चलदी दूध मधानी अटकी,

बैरन बंसी मन विच खटकी,

ली गयी चित्त चुरा के,

मन मोह लेआ कुंडला वाले ने।

सईओ नी मैं हो गयी झल्ली,

पीड विछोड़ेआ वाली सल्ली,

पिया मिलन नु कल्ली चली,

भगवा वेस बना के,

मन मोह लेआ कुंडला वाले ने।

सइयो पंथ प्रेम दा औखा,

चलना औखा ते कहना सौखा,

श्याम मिलन डा यहिओ मौका,

लबदा आप गवा के,

मन मोह लेआ कुंडला वाले ने।

की दस्सां कुझ वस् ना मेरे,

पांदी गलिया सो सो फेरे,

आजा प्रीतम सांझ सवेरे,

रूप अनूप सजा के,

मन मोह लेआ कुंडला वाले ने।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।