क्या मैं देखु यहाँ के नज़ारे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

तेरे चहेरे से नजरे न हटती क्या मैं देखु यहाँ के नज़ारे,

मेरे नैनो को कुछ भी न भये और नहीं कोई इस में समाये,

कोई दूजी छवि अब न जचती क्या मैं देखु यहाँ के नज़ारे,

नहीं बैकुंठ की मुझ को चाहत नहीं स्वर्ग की है कोई ख्वाइश,

मेरे खाटू में ही साँस निकले बस इतनी सी है गुजारिश,

तू मेरे सामने हो तुजमे समउ चरणों में तेरी मैं अर्ज लगाऊ,

मेरी आखियो को तेरे सिवा कुछ न दे दिखाई,

तेरी गलियों में जन्नत है बस्ती ,

क्या मैं देखु यहाँ के नज़ारे.....

तूने बदली है मेरी ये दुनिया जब से ओढ़ी है तेरी चदरियाँ,

देख ते देख ते तुझ को बाबा बीत जाए ये सारी उमरियाँ,

जिसको सुन के तू खुश हो जाये श्याम तराने वो तुम को सुनाये,

तेरे भजनो की मैफिल युही सजती रही,

हर कोई होता तेरा दीवाना जो भी आया है दर पे तुम्हारे ,

क्या मैं देखु यहाँ के नज़ारे......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।