ना ऐवे तरसा साईं

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॥ पावन पाठ ॥

ना एवे तरसा साईं वे कर्म कमा साईं,

मैं चावा दीदार तेरा मैं करा इतजार तेरा,

आ दर्श दिखा साईं,

अखियाँ मीच के प्यार लगावा प्यार ज़रा लगदा है,

मन मरजाना रूढ़ पुढ जाना मोह माया वल भज्दा है,

किवे करा किह्नु कवा कर कमाना,

कर उपकार तेरा मैं करा इंतज़ार तेरा,

आ दर्श दिखा साईं,

ना ऐवे तरसा साईं........

दिल विच रह के दिल तो साईंया दूर तू कहणु वस् दा है,

हर पल भगता दे अंग संग आ क्यों फिर मुड़ मुड़ दसना है,

एहो दुया परदे हटा सामने आ मना मैं उपकार तेरा,

मैं करा इंतज़ार तेरा,

आ दर्श दिखा साईं,

ना ऐवे तरसा साईं........

दिल दी दिल विच रख रख साहिल रोग अवाल्डा लाया है,

जिस ली सारा जग ठुकराया उस ने भी फ़रमाया है,

तेरे जेहा किथो लबा फेरा पा मना मैं उपकार तेरा,

मैं करा इंतज़ार तेरा,

आ दर्श दिखा साईं,

ना ऐवे तरसा साईं........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।