याद क्यों ना आएगी

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

याद क्यों न आये गई क्यों न मुझे रुलायेगी,

जब तक जियुगा ये अखियां नीर बहाये गी,

याद क्यों ना आएगी....

बनके मुसाफिर मारा मारा फिर,

मंजिले मिली न रास्ता मिला,

अपनों के चकर में ऐसा फसा,

मेरी मजबूरियों पे जग ये हसा,

मुझको क्या पता था दुनिया एक दिन भुलाये गी,

जब तक जियुगा ये अखियां नीर बहाये गी,

याद क्यों ना आएगी....

हार के मैं आखर बिखर के गिरा,

देखा बगल में मेरे तू था खड़ा,

अब क्या ज़माने की परवाह मुझे,

सब कुछ मिला है मुझे पाके तुझे,

तेरे होते अब क्या बाबा दुनिया मुझे डारये गी,

जब तक जियुगा ये अखियां नीर बहाये गी,

याद क्यों ना आएगी....

भूले से भी ना भूल पाउगा मैं,

जब तक जियुगा यही गाऊगा,

मैं श्याम कहे जो तेरा साथ मिला,

मुझको भी एक दीना नाथ मिला,

जिस दिन मुझसे तू रूठा तो सांसे मेरी रुक जाए गी,

जब तक जियुगा ये अखियां नीर बहाये गी,

याद क्यों ना आएगी....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।