प्रथम पूज्य गजबदन विनायक

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

प्रथम पूज्य गजबदन विनायक, महादेव-सुत बनो सहायक ॥

सुमुख सखा सबके सुखदायक, महादेव-सुत बनो सहायक,

प्रथम पूज्य गजबदन विनायक, महादेव-सुत बनो सहायक,

अजीब दुनियाँ अजीब नाते,

अजीब दुनियाँ अजीब नाते, हे देव पल भर मुझे न भाते,

हे देव पल भर मुझे न भाते,

नमन तुम्हें हे विधि-विधायक, महादेव-सुत बनो सहायक,

प्रथम पूज्य गजबदन विनायक......

नहीं जगत में है कोई मेरा,

नहीं जगत में है कोई मेरा, बस इक सहारा है देव तेरा,

बस इक सहारा है देव तेरा,

महादेव मन-मोद-प्रदायक, महादेव-सुत बनो सहायक,

प्रथम पूज्य गजबदन विनायक......

हे गजबदन में हुआ दीवाना,

हे गजबदन में हुआ दीवाना, यही तो कहता है ये जमाना,

यही तो कहता है ये जमाना,

तुम्हीं सम्हालो वर-वरदायक, महादेव-सुत बनो सहायक,

प्रथम पूज्य गजबदन विनायक.....

सुमुख सखा सबके सुखदायक, महादेव-सुत बनो सहायक,

प्रथम पूज्य गजबदन विनायक, महादेव-सुत बनो सहायक,

(गीत रचना- अशोक कुमार खरे)

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।