जिन्दगी मेरी यूँ ही गुजर गयी

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॥ पावन पाठ ॥

जिन्दगी मेरी यूँ ही गुजर गयी,

बिन तेरे साईं बिन तेरे साईं ॥

पापी था ये मन पापी ये जीवन,

बुरी संगत थी भटका था योबन ॥

बस उमरिया मेरी बीती युही बीती,

जिन्दगी मेरी यूँ ही गुजर गयी

मन भटक ता था सांस रूकती थी ,

याद में तेरी आंखे रोती थी,

सारी दुनिया से हारा तेरी भक्ति मैंने की,

जिन्दगी मेरी यूँ ही गुजर गयी....

रखलो शिर्डी में दास तेरा हु,

शिर्डी वाले मैं दास तेरा हु,

मेरी किस्मत जगा दे मलू माथे पे बबुती,

जिन्दगी मेरी यूँ ही गुजर गयी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।