गौरि नंदन हे दुःख भंजन श्रीगणेश

पारंपरिक
श्री गणेश भजन गणेश भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

गौरि नंदन, हे दुःख भंजन श्रीगणेश तुम्हारा क्या कहना,

मंगल-मूरत हे सिद्धि सदन, मंगल मूरत हे सिद्धि-सदन,

तुम आन हृदय मेरे रहना, गौरि नंदन हे दुःख भंजन,

सिर मुकुट-शशी, गल-रत्नहार, कर विघ्नपाश शोभा पाता,

इक कर-मध्ये मोदक या वेद, इक कर अशीष जग को भाता,

इक कर-मध्ये शोभित कुठार, इक कर-मध्ये शोभित कुठार,

दुष्टों का दलन करते रहना, गौरि-नंदन, हे दुःख-भंजन,

गज-बदन विनायक लम्बोदरं, हे सूपकर्ण मूषक-वाहन,

सेवा में सिद्धि-बुद्धि सदा, सुर-नर-मुनि करते आवाहन,

हे विद्या-वारिधि विघ्न, हरो, हे विद्या-वारिधि विघ्न, हरो,

हूँ शरण दया मुझ पै करना, गौरि-नंदन, हे दुःख-भंजन,

श्रीगणेश तुम्हारा क्या कहना, मंगल-मूरत हे सिद्धि-सदन,

मंगल-मूरत हे सिद्धि-सदन, तुम आन हृदय मेरे रहना,

गौरि-नंदन, हे दुःख-भंजन,

(गीत रचना- अशोक कुमार खरे)

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।