पुष्पताग्रा छंद

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

श्री भीष्म उवाच –

इति मतिरुपकल्पिता वितृष्णा भगवति सात्वत पुङ्गवे विभूम्नि । स्वसुखमुपगते क्वचिद्विहर्तुं प्रकृतिमुपेयुषि यद्भवप्रवाहः ॥१॥

त्रिभुवनकमनं तमालवर्णं रविकर गौरवराम्बरं दधाने । वपुरल ककुला वृताननाब्जं विजयसखे रतिरस्तु मेऽनवद्या ॥२ ॥

युधि तुरगरजो विधूम्रविष्वक्क चलुलितश्रम वार्यलंकृतास्ये । मम निशितशरै र्विभिद्यमान त्वचि विलसत्कवचेऽस्तु कृष्ण आत्मा ॥३॥

सपदि सखिवचो निशम्य मध्ये निज परयोर बलयो रथं निवेश्य । स्थितवति परसैनिका युरक्ष्णा हृतवति पार्थ सखे रतिर्ममास्तु ॥४॥

व्यवहित पृथनामुखं निरीक्ष्य स्वजनवधाद्विमुखस्य दोषबुद्ध्या। कुमतिम हरदात्म विद्यया यश्चरणरतिः परमस्य तस्य मेऽस्तु ॥५॥

स्वनिगम मपहाय मत्प्रतिज्ञा मृतमधिकर्तुमवप्लुतो रथस्थः । धृतरथचरणोऽभ्ययाच्चलत्गुः हरिरिव हन्तुमिभं गतोत्तरीयः ॥६॥

P. Shaan dubey

No.9753443574/ ९७५५३०५७८३

Chand (Chhindwara)

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।