मेरे उठे कलेजे पीड़ वृन्दावन जाउंगी

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मेरे उठे कलेजे पीड़ सखी, वृन्दावन जाउंगी।

बाजे मुरली यमुना तीर सखी, वृन्दावन जाउंगी॥

श्याम सलोनी सूरत की दीवानी हो गई।

सखी, कैसे पाऊं धीर, वृन्दावन जाउंगी॥

नैन लगे घिरीधर से, मैं तो पागल हो गयी।

अब कैसे दिखाऊं दिल चीर, सखी वृन्दावन जाउंगी॥

छूट गया मेरा भोजन पानी, श्याम की याद में।

दुनिया से भई फ़कीर सखी, वृन्दावन जाउंगी॥

वृन्दावन जाउंगी सखी, बरसाना जाउंगी,

बरसाना जाउंगी सखी, गोवर्धन जाउंगी,

गोवर्धन जाउंगी सखी, राधा कुण्ड नहाउंगी,

राधा कुण्ड नहाउंगी सखी, योगन बन जाउंगी,

योगन बन जाउंगी सखी, गिरिधर गुण गाऊँगी,

मेरे उठे कलेजे पीड़ सखी, वृन्दावन जाउंगी॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।