साई मैं तेरे दर आया जो हार कर

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॥ पावन पाठ ॥

साई मैं तेरे दर आया जो हार कर तुन्हे पकड़ी कलाई तो मजा आ गया,

अब न चिंता फ़िक्र दिल में रहता न डर ज़िंदगी मुस्कुराई मजा आ गया,

हर कदम ठोकरे खाता चलता था मैं,

गिरता था और खुद ही सम्बल ता था मैं,

अब जो ठोकर लगे बड़के तू थाम ले,

गिरना पाउ मैं साई मजा आ गया,

साई मैं तेरे दर आया जो हार ..

मुझपे किरपा की तेरी नजर जो पड़ी तेरी मस्ती में साई राहु हर घडी,

रखा सिर पे जो हाथ तूने ऊ साई नाथ प्रीत तेरी है पाई मजा आ गया,

साई मैं तेरे दर आया जो हार...

तेरे दरबार की मैं करू चाकरी रोज तेरी बजता राहु हज़ारी,

यही मेरी उम्र जाए कुंदन गुजर तुजसे अर्जी लगाई मजा आ गया,

साई मैं तेरे दर आया जो हार.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।