दुःखी दुनियाँ में सुरनायक

पारंपरिक
श्री गणेश भजन गणेश भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

दुःखी दुनियाँ में सुरनायक, मुझे अब कुछ नहीं भाता ॥

कहाँ जाऊ करूँ क्या मैं, समझ कुछ भी नहीं आता,

दुःखी दुनियाँ में सुरनायक.....

जिन्हें समझा सदा अपना, हुए साबित पराये ही ॥

हुए साबित पराये ही,

दया-सागर दया करिये, दया-सागर दया करिये,

हृदय धीरज नहीं आता,

कहाँ जाऊँ करूँ क्या मैं, समझ कुछ-भी नहीं आता,

दुःखी दुनियाँ में सुरनायक.......

कपट मन में छुपा मानव, दिखाते प्रेम ऊपर से ॥

दिखाते प्रेम ऊपर से,

सताते एक दूजे को, सताते एक-दूजे को,

ये है कैसा अजब नाता,

कहाँ जाऊँ करूँ क्या मैं, समझ कुछ-भी नहीं आता,

दुःखी दुनियाँ में सुरनायक...........

करो अब नष्ट भारत से, हे गौरिसुत अमङ्गल को ॥

हे गौरिसुत अमङ्गल को,

सुखी माँ भारती होगी, सुखी माँ भारती होगी,

हे सिद्धि-बुद्धि के दाता,

कहाँ जाऊँ करूँ क्या मैं, समझ कुछ-भी नहीं आता,

दुःखी दुनियाँ में सुरनायक............

(गीत रचना-अशोक कुमार खरे)

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।