मुझे चढ़ गया साईं रंग रंग

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॥ पावन पाठ ॥

ये साईं रंग साईं का रंग,

मुझे आज चढ़े साईं की उमंग,

दिल झुमें गाये संग संग,

मुझे चढ़ गया साईं रंग रंग,

है दुनिया के रंग सब कच्चे,

साईं के रंग है बस पक्के,

इस रंग में जो रंग जाता है मुह मांगे मुरादी पाता है,

ये रंग है सची भक्ति का,साईं बाबा की मस्ती का,

ये रंग है साईं की तरंग चढ़ के नही उतरेगा ये रंग,

मुझे चढ़ गया साईं रंग रंग......

रंगों में रंग निराला है सुख दुःख में जो रंगवाला है,

सुख में खुशिया बरसता है दुःख में धीरज बन जाता है,

सेवा की और समपर्ण की देता है भवाना अर्पण की,

ये रंग है साईं की तरंग जीने का बदले ढंग ढंग,

मुझे चढ़ गया साईं रंग रंग......

शिर्डी वाले के रंगों में साईं की मस्त उमंगो में,

अपना तन मन जो रंगते है खुशियों से दामन भरते है,

साहिल तू भी झोला रंग ले सब कुछ उसको अर्पण करदे,

ये रंग है साईं की तरंग बन जा बाबा का मस्त मलंग,

मुझे चढ़ गया साईं रंग रंग......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।