आनंदले रंगले दंगले

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

आनंदले रंगले दंगले,आनंदले रंगले दंगले ॥

भाव सुमने माळून ,भक्ति चंदने लेपून ॥

रोम रोमातून मी गंधले,

आनंदले रंगले दंगले......

जिथे ठेविले मस्तक, तिथे तुझे रे चरण

जिते-तिथे पाही देवा , तुझे रूप हे लोचन

मूक जाहली रे वाचा, अश्रु अमृत पिऊन,

हृदयातल्या स्पंदनी, हरी नाम उच्चारण

(श्री राम जय राम , जय जय राम )

ऐसा कृपेचा वर्षाव, तुडुंबला भक्ति भाव

अंग अंग अंतरंग ... चिंबले || १||

गीत-संगीत : अरुण सराफ

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।