सम्हालो सम्हालो मुझे श्यामसुन्दर

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

सम्हालो-सम्हालो मुझे श्यामसुन्दर,

विषय वासना में कहीं घिर न जाऊँ,

हे सरसिज-नयन श्याम, ब्रज के दुलारे,

कहीं पाप के पंक में गिर न जाऊँ,

ओ तड़पता हूँ हर रोज मैं, ओ श्याम तेरे लिये,

मिलेगा तूँ कैसे मुझे, बहुत पाप मैंने किये,

बहुत पाप मैंने किये,

कुकर्मों का सागर, कहीं भर न जाये,

तुझे पाप अपने, मैं कैसे बताऊँ,

सम्हालो-सम्हालो मुझे श्यामसुन्दर,

विषय-वासना में कहीं घिर न जाऊँ,

बहुत इश्क़ तुझसे किया, हो दीदार कैसे बता,

हो.. दयाधाम होकर तेरी, ये कैसी है हठधर्मिता,

ये कैसी है हठधर्मिता,

ये दर्द-ए-मोहब्बत, जो तूँ दे रहा है,

बता दे मुझे, जाके किसको सुनाऊँ,

सम्हालो-सम्हालो मुझे श्यामसुन्दर,

विषय-वासना में कहीं घिर न जाऊँ,

हो.. माना कि तुम हो ख़ुदा, दिखते किसी को नहीं,

झूँठे ! अवध याद कर, ब्रज में क्या घूमे नहीं,

है तेरे दरश बिन, ये जीवन अधूरा,

ये दर्दे-ए-बयाँ श्याम, किसको सुनाऊँ,

सम्हालो-सम्हालो मुझे श्यामसुन्दर,

विषय-वासना में कहीं घिर न जाऊँ,

हे सरसिज-नयन श्याम, ब्रज के दुलारे,

कहीं पाप के पंक में गिर न जाऊँ,

विषय-वासना में कहीं घिर न जाऊँ,

कहीं पाप के पंक में गिर न जाऊँ,

विषय-वासना में कहीं घिर न जाऊँ,

गीत रचना- अशोक कुमार खरे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।