खुले है मन मंदिर के द्वार

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

पधारो राधा संग सरकार,

खुले है मन मंदिर के द्वार ॥

पधारो राधा संग सरकार॥

यमुना के तट पे मैं दोड़ी आऊ,

तेरा दर्शन नित प्रति पाऊ,

कर दर्शन मैं तेरा प्यारे पुन पुन होत निहाल,

खुले है मन मंदिर के द्वार......

कब से बाँट में जोए रहू है,

तुम संग नेह लगाये रही हु,

आजा मोहन रसिया आजा,

मत करवा इंतज़ार,

खुले है मन मंदिर के द्वार.....

युगल शवि की अखियाँ प्यासी,

दर्शन दे जा ओ ब्रिज वासी,

ओ ब्रिज वासी तू सुन ब्रिज बसी,

तुम बिन सुना सुना लागे,

ये सारा संसार,

खुले है मन मंदिर के द्वार....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।