मन चल रे गुरु के धाम

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

मन चल रे गुरु के धाम हरी हरी गायेगे ॥

गाएँगे गवाएंगे नाचेंगे नचाएगे झूमेंगे झुमाएगे

मन चल रे गुरु के..........

भव बन्धन से मोह हटाले गुरु चरणों से द्ययान लगा ले ॥

तेरे बन जायेगे बिगड़े काम हरी हरी गायेगे ॥

मन चल रे गुरु के...........

गुरु जी तेरे रब से मिलाऐ ब्रह्म ज्ञान करते करवाये ॥

ना रिस्वत लगेगी ना धाम हरी हरी गायेगे ॥

मन चल रे गुरु के...........

गुरु से ज्ञान आज्ञान से मुक्ति.बतलाते सदगुरु जी बुद्धि ॥

लगे आवागवन से विराम हरी हरी गायेगे ॥

मन चल रे गुरु के.......

अन्धकार गुरु प्रकाश है. मन बुद्धि में परिभासा है ॥

है सर्वपरी ये नाम हरी हरी गायेगे,

मन चल रे गुरु के धाम हरी हरी गायेगे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।