जीवन का भरोसा नही कब मौत आ जायेगी

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॥ पावन पाठ ॥

जीवन का भरोसा नही कब मौत आ जायेगी

काया और माया तेरी तेरे साथ न जाएगी ॥

काया पे गुमान न कर ये माटी का खिलौना है ॥

तेरा और मेरा छोड़ तेरी जीवन ज्योति बुझ जायगी ॥

काया ओर माया तेरी.......

दौलत पे गुमान न कर ये हाथ का मैंला है ॥

राजा है या रंक कोई सब किस्मत का खेला है ॥

झूठी है ये माया नगरी सब पल में पल में पलट जाएगी॥

काया और माया तेरी........

दो दिन का मेला है सब माया का ठेला है॥

जाए नही साथ कोई.तुजे जाना अकेला है ॥

पलक झपकते ही.दुनिया तुझे ठुकराएगी ॥

काया ओर माया तेरी.......

रिस्तो का भरोसा न कर दुनिया से तू आशा न कर ॥

तुझे तरना हो भव सागर गुरु जी का तू सुमिरन कर॥

भक्ति की शक्ति से तेरी जीवन नैया तर जायेगी॥

काया और माया तेरी.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।