नज़ाकत छोड़ के

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

नज़ाकत छोड़ के हम तो सरे बाज़ार नाचे गये,

साईं दरबार नाचे गये,

नचने दे मुझे नचने दे बाबा के दवारे मुझे नचने दे,

पाओ में पायल बालो में गजरा आँखों में मेरी कजरा है ॥

सजने दे मुझे सजने दे अरे बाबा के लिए मुझे सजने दे,

मिरदंग बाजे ढोलक बाजे साईं भजन में तबला भाजे,

अरे डेल्ही में मेला लगा है साईं नाथ का,

आओ दीवानों जशने मनाये,

आये है जी आये है मेला घुमन आये है,

फेसला वाही होगा जात और पात का,

आओ दीवानों शिर्डी चले,

डेल्ही में मेला लगा है साईं का....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।