मेरे मन में है राम मेरे तन में है राम

मोहम्मद रफ़ी
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

मेरे मन में है राम, मेरे तन में है राम ।

मेरे नैनो की नगरिया में राम है ॥

मेरे रोम रोम के है राम ही रमिया,

साँसों के स्वामी, मेरी नैया के खिवैया।

कण कण में हैं राम, त्रिभुवन में हैं राम,

नीले नभ की अटरिया में राम है॥

जनम जनम का जिन से है नाता,

मन जिन के पल छीन गुण गाता।

गुण धुन में है राम, रन झुन में है राम,

सारे जग की डगरिया में राम है॥

जहाँ कहीं देखूं वहीं राम की है माया,

सब ही के साथ श्री राम जी की छाया ।

सुमिरन में है राम, दर्शन में है राम,

मेरे मन की मुरलिया में राम है॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।