दर्शन दीजे नाम सनेही

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॥ पावन पाठ ॥

दर्शन दीजे नाम सनेही,

तुम बिन दुःख पावे मेरी देही,

अन्न ना भावे नींद न आवे,

बार बार मोहे बिरहा सतावे,

अन्न ना भावे नींद न आवे,

बार बार मोहे बिरहा सतावे,

दर्शन दीजे नाम सनेही,

तुम बिन दुःख पावे मेरी देही,

नैनन चलत सजल जलधारा,

निश दिन पंथ निहारु तुम्हारा,

नैनन चलत सजल जलधारा,

निश दिन पंथ निहारु तुम्हारा,

दर्शन दीजे नाम सनेही,

तुम बिन दुःख पावे मेरी देही,

गृह आंगन मोहे कछु न सहाई,

बजर पई और फिरयो न जाई,

गृह आंगन मोहे कछु न सहाई,

बजर पई और फिरयो न जाई,

दर्शन दीजे नाम सनेही,

तुम बिन दुःख पावे मेरी देही,

मीन मरे जैसे बिन नीरा,

ऐसे तुम बिन दुखत शरीरा,

मीन मरे जैसे बिन नीरा,

ऐसे तुम बिन दुखत शरीरा,

दास कबीर जै करत विनंती,

महापुरूष अब मानिये,

दया कीजे, दर्शन दीजे,

दया कीजे, दर्शन दीजे,

अपनाकर मोहे जानिए,

दर्शन दीजे नाम सनेही,

तुम बिन दुःख पावे मेरी देही,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।