एक ही उस माँ की हम दोनों संतान

पारंपरिक
हनुमान जी आरती विविध भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

एक ही उस माँ की हम दोनों संतान,

एक बना हिन्दू तो एक मुसलमान॥

एक जाके मंदिर में घंटा वजाए,

एक जाके आल्हा आल्हा भुलाये,

एक कारे आरती तो एक करे अज़ान,

एक बना हिन्दू तो एक मुसलमान.....

हिन्दू के जैसे पूज बजरंग बलि है,

मुस्लमान के पैगम्बर हजरत अली है,

एक पड़े गीता तो एक पड़े कुरान,

एक बना हिन्दू तो एक मुसलमान.....

मंदिर में जाके एक चुनर चदाये,

दरगाह में जाके एक चादर चदाये,

एक तरफ कनेरियां तो एक तरफ पठान,

एक बना हिन्दू तो एक मुसलमान....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।