जी मै तेरी तेरी तेरी सच्चे बादशाह

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॥ पावन पाठ ॥

जी मै तेरी तेरी तेरी सच्चे बादशाह के रख लै गरीब जाण के

सुन फ़रियाद पीरा देया पीरा॥

मै आख सुनावा किन्नु हूँ,

के रख लै गरीब जाण के,

तेरे जीया मेनू होर न कोई॥

मै जई हाँ लख तेनू हूँ

के रख लै गरीब जाण के

जी मै तेरी तेरी तेरी सच्चे बादशाह के रख लै गरीब जाण के....

खोल न कागज बदीआ वाले ॥

दर तो ना धक देई मेनू हूँ,

के रख लै गरीब जाण के,

मै विच ऐड गुनाह ना होंदे ॥

बाहू तू बक्शेंदा किन्नू हूँ,

के रख लै गरीब जाण के,

जी मै तेरी तेरी तेरी सच्चे बादशाह के रख लै गरीब जाण के,

सुन फ़रियाद पीरा देया पीरा॥

मेरी अरज सुनी कान धारके हूँ॥

के रख लै गरीब जाण के.......

मेरा बेड़ा अडया विच कपरा दे॥

जित्थे माछ ना पेंदे टरके हूँ

के रख लै गरीब जाण के

जी मै तेरी तेरी तेरी सच्चे बादशाह के रख लै गरीब जाण के...

शाह जलानी मेहबूब सुहानी॥

मेरी खबर लयो झट करके हूँ के रख लै गरीब जाण के

पीर जिन्हा दा मीरा बाहू ॥

सोई कंदे लगदे तर के हूँ

के रख लै गरीब जाण के

जी मै तेरी तेरी तेरी सच्चे बादशाह के रख लै गरीब जाण के..

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।