अखियाँ नई रज्जिया तेरा

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॥ पावन पाठ ॥

अखियाँ नई रज्जिया तेरा कर के दीदार सोणेया ॥

तू ता पुनाया दा चान लगदे तेरी ऐथे ओथे जय होवे,

तेरे चान जहे मुखड़े तो देवा सब कुझ वार सोणेया ॥

अखियाँ नई रज्जिया तेरा कर के दीदार सोणेया,

मै कर्मा दी मारी ने तेरा दर खडकाया ऐ,

तेरीया तू जाणे असा राब तेनू चाया ऐ,

अखियाँ नई रज्जिया तेरा कर के दीदार सोणेया,

तेरे दर वी ना थां कोई ना कित्थे दई ना विसार सोणेया॥

लोकी तीरथा जांदे ने साडा रब ते ब्यास वसदा,

अखियाँ नई रज्जिया तेरा कर के दीदार सोणेया,

हुण पावी विछोडा ना कर के करार सोणेया,

अखियाँ नई रज्जिया तेरा कर के दीदार सोणेया,

तू ता जुग जुग जी सोणेया तेरी ऐथे ओथे लोड़ सोणेया ॥

जित्थे हाथ तू पा लवे ओथे मिले ना थोड सोणेया

अखियाँ नई रज्जिया तेरा कर के दीदार सोणेया.........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।