अपने रंग विच रंग देओ जी

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॥ पावन पाठ ॥

अपने रंग विच रंग देओ जी,

के मैलिया ने साड़ियाँ रूहा॥

हम मैले तुम उजल करते,

हम निर्गुण तू दाता,

हम मूरख तुम चतर सियाणे,

तुम सर्व कला के ज्ञाता जी मैलिया ने साड़ियाँ रूहा.....

माधो हम ऐसे तू ऐसा

माधो हम ऐसे तू ऐसा

हम पापी तू पाप् खंडन

निकोठाकुर देसा जी मैलिया ने साड़ियाँ रूहा.....

तुम सब साजे साज निवाजे

जियो पिंड दे प्राणा

निर्गुण और गुण नाही कोई

तुम दान दियो मेहरबाना जी मैलिया ने साड़ियाँ रूहा......

तुम निधान अटल सुलताना

जिया जंत सब जांचे

कहो नानक हमे है हवाला

राखो सब संतन के पीछे जी मैलिया ने साड़ियाँ रूहा.....

तुम करो भला हम भला नाही जाने

तुम सदा सदा दयाला

तुम सुखदाई तुम पुरख विधाते

तुम राखो अपने वाला जी मैलिया ने साड़ियाँ रूहा......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।