माँ कात्यायनी जी की आरती

पारंपरिक
महादेव आरती दुर्गा भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

जय कात्यायनि माँ, मैया जय कात्यायनि माँ ।

उपमा रहित भवानी, दूँ किसकी उपमा ॥

मैया जय कात्यायनि....

गिरजापति शिव का तप, असुर रम्भ कीन्हाँ ।

वर-फल जन्म रम्भ गृह, महिषासुर लीन्हाँ ॥

मैया जय कात्यायनि....

कर शशांक-शेखर तप, महिषासुर भारी ।

शासन कियो सुरन पर, बन अत्याचारी ॥

मैया जय कात्यायनि....

त्रिनयन ब्रह्म शचीपति, पहुँचे, अच्युत गृह ।

महिषासुर बध हेतू, सुर कीन्हौं आग्रह ॥

मैया जय कात्यायनि....

सुन पुकार देवन मुख, तेज हुआ मुखरित ।

जन्म लियो कात्यायनि, सुर-नर-मुनि के हित ॥

मैया जय कात्यायनि....

अश्विन कृष्ण-चौथ पर, प्रकटी भवभामिनि ।

पूजे ऋषि कात्यायन, नाम काऽऽत्यायिनि ॥

मैया जय कात्यायनि....

अश्विन शुक्ल-दशी को, महिषासुर मारा ।

नाम पड़ा रणचण्डी, मरणलोक न्यारा ॥

मैया जय कात्यायनि....

दूजे कल्प संहारा, रूप भद्रकाली ।

तीजे कल्प में दुर्गा, मारा बलशाली ॥

मैया जय कात्यायनि....

दीन्हौं पद पार्षद निज, जगतजननि माया ।

देवी सँग महिषासुर, रूप बहुत भाया ॥

मैया जय कात्यायनि....

उमा रमा ब्रह्माणी, सीता श्रीराधा ।

तुम सुर-मुनि मन-मोहनि, हरिये भव-बाधा ॥

मैया जय कात्यायनि....

जयति मङ्गला काली, आद्या भवमोचनि ।

सत्यानन्दस्वरूपणि, महिषासुर-मर्दनि ॥

मैया जय कात्यायनि....

जय-जय अग्निज्वाला, साध्वी भवप्रीता ।

करो हरण दुःख मेरे, भव्या सुपुनीता॥

मैया जय कात्यायनि....

अघहारिणि भवतारिणि, चरण-शरण दीजै ।

हृदय-निवासिनि दुर्गा, कृपा-दृष्टि कीजै ॥

मैया जय कात्यायनि....

ब्रह्मा अक्षर शिवजी, तुमको नित ध्यावै ।

करत 'अशोक' नीराजन, वाञ्छितफल पावै॥

मैया जय कात्यायनि....

(आरती रचना-अशोक कुमार खरे)

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।