गुरुदेव दया कर दो

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॥ पावन पाठ ॥

गुरुदेव दया करदो मुझ पर, मुझे अपनी शरण में रहने दो,

मुझे ज्ञान के सागर से स्वामी अब ,निर्मल गागर भरने दो,

तुम्हारी शरण मे जो कोई आया,पार हुआ एक ही पल में,

इस दर पर हम भी आये है ,इस दर पर गुजारा करने दो,

गुरुदेव दया करके............

सर पर छाया घोर अंधेरा,सूझत नाही है राह कोई,

ये नयन मेरे ओर ज्योति तेरी,इन नेनो को भी बहने दो,

मुझे ज्ञान ....................

चाहे डूबा दो .चाहे तैरा दो,मर भी गए तो देंगे दुआ

ये नाव मेरी ओर हाथ तेरे,मुझे भव सागर से तरने दो,

मुझे ज्ञान .............

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।