फागुन अधुरा सूरजगढ़ निशान के बिना

पारंपरिक
हनुमान जी भजन खाटू श्याम भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

दरबार अधुरा बाबा का हनुमान के बिना,

फागुन अधुरा सूरजगढ़ निशान के बिना,

कहती है दुनियां सारी है ध्वज की महिमा न्यारी,

और राह देखते इसकी देखो खुद श्याम बिहारी,

है भगत अधुरा जैसे भगवान के बिना,

फागुन अधुरा....

कई शहर घूमके जाता फिर खाटू धाम को आता,

और शिखर बंद पे सदके मेले की शान बडाता,

परिवार अधुरा जैसे संतान के बिना,

फागुन अधुरा....

अब ऋषि इत्नु तू चाहे जीवन को धन्ये बनाना,

जब भी मौका मिल जाए सूरजगढ़ जरुर आना,

दातार अधुरा जैसे कन्या दान के बिना,

फागुन अधुरा.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।