सुख दुःख तेरे हाथ संवारे तेरी मर्जी चलती है

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

सुख दुःख तेरे हाथ संवारे तेरी मर्जी चलती है,

सबको है मालुम ये दुनिया तेरे भरोसे पलती है,

सुख दुःख तेरे हाथ संवारे तेरी मर्जी चलती है,

जिसको मिलतीरहमत तेरी वो प्राणी इत्रराता है,

बिन बोले ही शरणागत को मुह माँगा मिल जाता है,

तेरे सवाले ही सांवरिया मेरी गरस्ती चलती है,

सुख दुःख तेरे हाथ संवारे तेरी मर्जी चलती है

तेरे प्रेम पे हे दीप जले है रोज दिवाली मनाते है,

तुझसा मालिक पा के हम तो फुले नही समाते है,

घर आंगन में तेरे नाम की जोत सदा जग ती है,

सुख दुःख तेरे हाथ संवारे तेरी मर्जी चलती है,

चाँद सितारे फूल नज़ारे तेरे दम पर हस्ते है,

चारो धाम के सुख भी सारे तेरी चरण में बस ते है,

खुशियों की लहराती नदिया तेरे चरण से निकलती है,

सुख दुःख तेरे हाथ संवारे तेरी मर्जी चलती है,

ओ सांवरियां हम भोले है भूल हमारी विसराना,

अगर हम कही भटक रहे तो कान पकड़ के सम्जाना,

चोखानी की आँखों में तेरी सावल शवि मचलती है,

सुख दुःख तेरे हाथ संवारे तेरी मर्जी चलती है

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।