दर्शन दो मरघट वाले

पारंपरिक
हनुमान जी भजन हनुमान भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

दर्शन के अमृत को बाबा प्यासा ये मनवा तरस रहा,

दर्शन दो मरघट वाले जन्मो से जीयारा तरस रहा ॥

सिंधुरीवर्ण अंजनी माता के तुम हो आख के तारे,

राम नाम का अमृत पीते अंग संग राम तुम्हारे ॥

महलो की परये बाबा प्यार तुम्हारा बरस रहा,

दर्शन दो मरघट वाले जन्मो........

राम चरण अस्थान तुम्हारा शिवशंकर अवतारी,

सिया राम का भगतन तुमको माने सब संसारी॥

सब देवो की शक्ति तुम में अजब नजारा बरस रहा,

दर्शन दो मरघट वाले जन्मो......

बाला बन में सूर्य गारस कर अपनी शक्ति दिखाई,

अंधकार में डूबी किश्ती मच गई तराही तराही ॥

देवो ने मिल अस्तुति गई प्रेम नजारा बरस रहा,

दर्शन दो मरघट वाले जन्मो.......

रणजीत राजा भी मरघट वाले भजन तुम्हारे गाये,

नाम खुमारी में मत वाला सबको साथ नाच्ये ॥

प्रेम की एसी लोह है लगी अखियो से पानी बरस रहा,

दर्शन दो मरघट वाले जन्मो........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।