मेरा साईं मेरा हजुर है

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॥ पावन पाठ ॥

तू है आली मैं हु खाली,तेरे दर की मैं सवाली,

तू विधाता सब का दाता किसा ये मशहुर है,

मेरा साईं मेरा हजुर है,मेरा बाबा मेरा हजुर है,

तेरे दर पे जो भी आया उसने जो माँगा वो पाया,

तेरी चोकथ जो मिली है मेरी किस्मत ये खिली है,

तेरे दर पे इस यहाँ में हर कोई मजबूर है,

मेरा साईं मेरा हजुर है.....

तेरे कदमो में है जन्नत दिल को मेरे मिलती राहत,

अपने कदमो में पन्हा दे,ज़िन्दगी मेरी बना दे,

मैं भूली हु यहाँ को दर तेरा मशहुर है,

मेरा साईं मेरा हजुर है........

हक़ है तेरा ज़िन्दगी पर तूने दी जो हर ख़ुशी पर,

खाख में चाहे मिला दे जो भी चाहे तू सिला है,

जो रजा बाबा तुम्हारी मुझको सब मंजूर है,

मेरा साईं मेरा हजुर है.......

तू है रहमत है फ़रिश्ता हर जगह मुझे तू ही दीखता,

मैं बड़ी तकदीर वाली मेरा साईं सब सयाली,

तू शहंशाह का शहंशाह तू खुदा का नूर है,

मेरा साईं मेरा हजुर है.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।