जिन्दगी एक किराए का घर है

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॥ पावन पाठ ॥

जिंदगी एक किराये का घर है,

एक न एक दिन बदलना पड़ेगा॥

मौत जब तुझको आवाज देगी ॥

घर से बाहर निलना पड़ेगा,

रूठ जाएँगी जब तुझसे खुशियाँ,

गम के साँचे मे ढलना पड़ेगा,

वक्त ऐसा भी आएगा नादान ॥

तुझको काँटोँ पर चलना पड़ेगा,

कितना माशूर हो जाएगा तू,

इतना मजबूर हो जाएगा तू,

ये जो मखमल का चोला है तेरा ॥

ये कफन मेँ बदलना पड़ेगा,

कर ले इमान से दिल की सफाई,

छोड़ दे छोड़ दे तू बुराई,

वक्त बाकी है अब भी संभल जा ॥

वरना दो ज़क मेँ जलना पड़ेगा,

ऐसी हो जाएगी तेरी हालत,

काम आएगी दौलत न ताकत,

छोड़कर अपनी उँची हवेली॥

तुझको बाहर निकलना पड़ेगा,

जलवा इ हुसन भी है और खतरा भी है ज्यदा,

जिंदगानी के ये रास्ता है हर कदम पर सम्बलना पड़ेगा,

बाप बेटे ये भाई भतीजे तेरे साथी है जीते जी के,

अपने आँगन से उठना पड़ेगा,

अपनी चौखट से टलना पड़ेगा,

जिंदगी एक किराये का घर है,

एक न एक दिन बदलना पड़ेगा......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।