इस श्याने करम

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॥ पावन पाठ ॥

इस श्याने कर्म का क्या कहना ॥

दर पे जो सवाली आते है,

इस श्याने कर्म का क्या कहना ॥

एक तेरी गरीबी का सदका,

वो झोलियाँ भर के जाते है,

भर गई भर रे झोली भर गई ॥

उनके कर्म से..॥

भर गई भर रे झोली भर गई ॥

जो मांगने से पहले भिखारी को भीख दे ॥

वेशक मेरी नजर में वो दाता तुम ही हो,

भर गई भर रे झोली भर गई ॥

उनके कर्म से..॥

भर गई भर रे झोली भर गई..

तेरी आशिकी से पहले मुझे कौन जानता था,

मुझे आपने नवाजा ते कर्म नही तो क्या है,

भर गई भर रे झोली भर गई ॥

उनके कर्म से..॥

उस दर सोगावत क्या कहिये,

खाली ना जाता कोई,

मोहताज यहाँ जो आते है,

वो झोलियाँ भर के जाते है,

इस दर सगावत क्या कहिये,

खाली ना जाता मंगता कोई,

मोहताज यहाँ जो आते है,

वो झोलियाँ भर के जाते है,

पक्के रिश्ते तेरी रहमत से जो बन जाते है,

कच्चे धागे से बने लोग चले आते है,

तू मिलादे चाहे भिचड़े हुए इंसानों को,

तेरे अनवाद कर्म शयद ये दिखलाते है,

खाली ना राह मंगता कोई,

मोहताज यहाँ जो आते है....

तू स्की ऐसा सकी है,

आप सा कोई नही है,

जो मांगने से पहले भिखारी को भीख दे,

वेशक मेरी नजर में वो दाता तुम ही हो,

इस श्याने कर्म का क्या कहना

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।