संवारे एक तू ही तो आस है

पारंपरिक
महादेव भजन खाटू श्याम भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

मझदार फसी नैया बड़ी दूर किनारा है,

एक तू ही आ के राख हारे का सहारा है

संवारे एक तू ही तो आस है,

संवारे तुझपे ही विश्वाश है,

जिनको समजा आपना वो काम नही आये,

अब तेरे बिन बाबा मुझे कौन बाताये,

मेरी जीवन नैया का तू पालन हारा है,

एक तुही आ तेरा हारे का सहारा है,

संवारे एक तू ही तो आस है...........

विश्वाश अटल मेरी नैया ना धोले गी,

दर भाव भरा हिरदये मूरत भी भोले गी,

दीनो में पुकारा है तू बना सहारा है,

एक तू ही आ तेरा हारे का सहारा है,

संवारे एक तू ही तो आस है...

दुनिया में नाम तेरा सुन कर मैं भी आया,

हारे का साथी है सबने ये बतलाया,

के एमबी हार रहा तो तुझे पुकार रहा,

एक तू ही आ तेरा हारे का सहारा है,

संवारे एक तू ही तो आस है

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।