किस्मत को लिखना भी तो है संवारे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मैं किस्मत को क्यों कोसु जब सारे खेल तुम्हारे,

किस्मत को लिखना भी तो है संवारे हाथ तुम्हारे,

होगा वही होना है जो लिखा है किस्मत में श्याम ने,

और कोई जोर नही मेरे कन्हिया के सामने,

जो अपना जोर चलाये फिरते है मारे मारे,

किस्मत को लिखना भी तो.........

करना है अगर कन्हिया ने तो फिर काहे की चिंता है,

क्या मिल गया क्या खो गया फिर काहे को गिन ता है,

तू छोड़ दे इन पे बाजी फिर बाज कभी ना हारे,

किस्मत को लिखना भी तो...........

कोई कहे धन देदे कोई कही दोलत दे,

विक्की कहे चरणों में रहने की थोरी मोलत दे,

सत्यम सोनी ये जीवन तेरे चरणों में ही गुजारे,

किस्मत को लिखना भी तो..........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।