मुझे अपना बनाया तूने क्यूँ कान्हा

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मुझे अपना बनाया तूने क्यूँ कान्हा

मुझे अपना बनाया तूने क्यूँ कान्हा,

ध्यान करूँ ना गुणगान करूँ,

पर दिल से लगाया तूने क्यूँ कान्हा,

मुझे अपना बनाया तूने क्यूँ कान्हा......

ठुकराया गया इस जग में जो,

उसे फिर से हँसाया तूने क्यूँ कान्हा,

मुझे अपना बनाया तूने क्यूँ कान्हा.......

भक्ति की राह न जाने जो,

उसे चरण बिठाया तूने क्यूँ कान्हा,

मुझे अपना बनाया तूने क्यूँ कान्हा.....

उपवन में जिसके पतझड़ था,

खूब चमन खिलाया तूने क्यूँ कान्हा,

मुझे अपना बनाया तूने क्यूँ कान्हा....

जो योग्य नहीं तेरी रहमत का,

उसे धन्य बनाया तूने क्यूँ कान्हा,

मुझे अपना बनाया तूने क्यूँ कान्हा....

आभार: ज्योति नारायण पाठक

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।