दाती तेरा भिखारी से रिश्ता युगों पुराना

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

दाती तेरा भिखारी से रिश्ता युगों पुराना,

सबने सब कुछ यहाँ से पाया हम को तो भी पाना है,

जिनको सारा जग ठुकरा दे उन्हें तुम गले लगाती हो

बेरेहमो ने कुचला जिनको रहम माँ उनपर खाती हो,

किसी के दर्दे जिगर का तुमसे छुपा नही अफसाना है,

दाती तेरा भिखारी से रिश्ता युगों पुराना,

फुला फला तेरी मैहर से गुलशन हर किसी की आस का,

तुमने कभी ना गला दबाया किसी के भी विश्वाश का,

तेरी ममता की शीतल छाया माँगता सारा जमाना है,

दाती तेरा भिखारी से रिश्ता युगों पुराना,

तुम बचो के भाग्य को पड़ कर कभी हस्ती कभी रोती हो,

सबको बराबर प्यार हो देती दूर ना किसी से होती हो,

मैया तेरे निर्दोष दरबार का हर कोई दीवाना है,

दाती तेरा भिखारी से रिश्ता युगों पुराना

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।