गोद में माँ की सोना है

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन विविध भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

श्याम है अर्ज मेरी उम्र घटा दो मेरी,

हां बचपन लोटा दो संग रहे माँ मेरी,

अब मुझे और बड़ा नही होना है,

गोद में माँ की सोना है,

ऊँगली पकड कर मैं चलू,

माँ हो मेरे साथ लोर सुनाये माँ मुझको सिर पर फेरे हाथ,

माँ की चाहत में जीवन भिगोना है,

गोद में माँ की सोना है....

भूख लगे जब भी मुझको माँ को दूआवाज,

माँ के हाथ से खाऊ खुद पर हो मुझे नाज,

दुनिया पीतल है सब माँ सोना है,

गोद में माँ की सोना है.....

हाथ फिरा कर सिर पे कहते बड़े तेरे वपार,

समय नही उस माँ की खातिर सब कुछ है बेकार,

छोड़ जाए गी माँ फिर रोना है,

गोद में माँ की सोना है.......

कुछ लोगो की नजरो में माँ की कदर नही,

भूधी आँखे तरस रही बेटे पर असर नही,

माँ के बिन सोनी जीना भी क्या जीना है,

गोद में माँ की सोना है

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।