जिस ने हरी गुण गाए हरी दौड़े चले आए

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

जिस ने हरी गुण गाए,

हरी दौड़े चले आए ।

भक्त प्रहलाद ने था पुकारा,

हिरण्यकशिपु को आकर के मारा ।

नरसिंह रूप धर आए,

हरी दौड़े चले आए ॥

दौपदी कौरवों से घिरी थी,

मुरली वाले से विनती करी थी ।

हरी आकर के चीर भडाए,

हरी दौड़े चले आए ॥

ऐसा भक्तों ने डाला थे फंदा,

प्रभु आप बने नाई नंदा ।

प्रेम से चरण दबाए,

हरी दौड़े चले आए ॥

दर्योधन के मेवा भी त्यागे,

भूख लागी तो उठ करके भागे ।

साग विधुर घर खाए,

हरी दौड़े चले आए ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।