मोहे अचम्भो है मेने हनुमान नहीं देखे

पारंपरिक
हनुमान जी भजन हनुमान भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

मोहे अचम्भो है मेने हनुमान नहीं देखे ॥

जनक पूरी में मेने नहीं देखे ॥

वह मेरो जनम भयो मेने हनुमान नहीं देखे ॥

अवध पूरी में मेने नहीं देखे ॥

वह मेरो ब्याह भयो मेने हनुमान नहीं देखे

पंचवटी में मेने नहीं देखे ॥

वहां मेरो हरण भयो मेने हनुमान है देखे

लंका पूरी में मेने नहीं देखे ॥

वहां मुझे राम मिले और मेने हनुमान वही देखे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।