मेहँदी ये शेरा वाली

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मेहँदी ये शेरा वाली मन को लुभाने वाली,

हाथो में तेरे मैया लगती है ये निराली,

माँ तेरा रंग मुझे भा गया,

तुम्हे किया माँ शिंगार तो कमाल हो गया,

जिसने किया तेरी दर्शन वो निहाल हो गया,

आये माँ के नवरात्रे खुशिया मानो रे,

आई रे नवरातो की रात रे देविया आज भक्तो के साथ रे,

आई रे नवरातो की रात रे जवला जगदम्बे माँ काली यहाँ आई है,

चण्डी मनसा दुर्गे शेरावाली आई है,

आरती गाये बंदा लहराए माँ का झंडा,

माँ तेरा रंग मुझे भा गया..........

देवगन देवी माँ को मनावे,

शारदे माँ वीणा बजावे,

और देव गन देवी माँ को मनावे,

जवाला का उजाला फेला चाँद सितारों में,

चमक रही है जोत माँ की सारे ही नजारों में,

शिव जी का डमरू बाजे जोगन के गुन्गरू बाजे,

जय माँ मैया का देखो छा गया,

माँ तेरा रंग मुझे भा गया...

नाचू रे माँ की द्वारे पे छम छम,

हो गये माँ की किरपा से दूर गम,

भक्तो की मैया की मैया तू ही खवैया रे,

मैया अब तू भारती की पार करो नैया रे,

माँ तेरी शोभा न्यारी भक्तो की तू है प्यारी,

माँ का भुलावा अब तो आ गया,

आया मैया जी के द्वार पे कमाल हो गया,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।